ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी? पेंटागन दूसरा विमानवाहक पोत तैनात करने को तैयार, ट्रंप के आदेश का इंतजार

नई दिल्ली। ईरान के साथ बढ़ती कूटनीतिक और सैन्य तनातनी के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ईरान के करीब दूसरा विमानवाहक पोत तैनात करने की योजना बना रहा है। इसका मकसद ईरान पर हथियार-स्तर के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर दबाव बढ़ाना है। हालांकि, इस तैनाती को लेकर अंतिम फैसला अभी राष्ट्रपति के आदेश पर निर्भर है।

यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश की संभावित तैनाती, ट्रंप के आदेश का इंतजार

अमेरिकी विमानवाहक पोत USS George H.W. Bush को ईस्ट कोस्ट से मध्य एशिया की ओर रवाना किए जाने की तैयारी है। फिलहाल यह पोत वर्जीनिया तट के पास प्रशिक्षण अभ्यास की श्रृंखला में हिस्सा ले रहा है। शिन्हुआ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित रवाना होने से पहले इस पर चल रहे अभ्यास को तेज़ी से पूरा किया जा सकता है।

हालांकि, राष्ट्रपति Donald Trump ने अब तक इसकी तैनाती के लिए आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है और परिस्थितियों के अनुसार योजना में बदलाव भी संभव है। यदि आदेश मिलता है तो यह पोत मार्च 2025 से मध्य एशिया में तैनात USS Harry S. Truman, USS Carl Vinson और USS Abraham Lincoln के साथ तैनात हो सकता है।

ईरान में 6000 स्टारलिंक टर्मिनल की तस्करी का दावा

इस बीच, The Wall Street Journal की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में सरकार विरोधी आंदोलन के तेज़ होने के बाद ट्रंप प्रशासन ने वहां करीब 6000 स्टारलिंक टर्मिनल की तस्करी कराई। स्टारलिंक, अरबपति कारोबारी Elon Musk की कंपनी है, जो सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराती है। इस दावे ने अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सीरिया में रणनीतिक अड्डे से अमेरिकी सेना की वापसी

इसी क्रम में अमेरिकी सेना ने गुरुवार को सीरिया में स्थित अपने एक रणनीतिक सैन्य अड्डे को खाली कर उसे सीरियाई सेना को सौंप दिया। इसे अमेरिका-सीरिया संबंधों में संभावित नरमी और भविष्य में और अधिक अमेरिकी सैन्य वापसी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

Al-Tanf छावनी सीरिया, जॉर्डन और इराक की त्रिपक्षीय सीमा पर स्थित है। वर्ष 2014 में सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान स्थापित इस अड्डे का इस्तेमाल अमेरिका ने इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन अभियानों के प्रमुख केंद्र के रूप में किया था।

बढ़ती सैन्य गतिविधियों, संभावित तैनाती और क्षेत्रीय रणनीतिक बदलावों के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति पर वैश्विक नजरें टिकी हुई हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और मजबूत होगी या कूटनीतिक रास्ता अपनाया जाएगा।

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